Saturday, March 17, 2018

Gudi Padwa 2018: जानें क्यों मनाया जाता है गुड़ी पड़वा, क्या है इसका महत्व

नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तानUpdated: Fri, 16 Mar 2018 12:33 PM IST
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जानें क्यों मनाया जाता है गुड़ी पड़वा

गुड़ी पड़वा 18 मार्च को चैत्र मास की शुक्‍ल प्रतिपदा के साथ मनाया जाएगा। इसके साथ ही हिन्‍दू नववर्ष की शुरुआत होती है। इसे हिन्दू नववर्ष, वर्ष प्रतिपदा, उगादि, नवसंवत्सर और युगादि भी कहा जाता है। हिन्दू सनातन् धर्म में गुड़ी पड़वा का खास महत्व है। 
गुड़ी पड़वा हर साल चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इससे नए साल की शुरुआत होती है। देश के शहरों में इसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है और मनाया जाता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा को बहुत खास तरह से मनाया जाता है।
वहीं गोवा और केरल में कोंकणी समुदाय इसे संवत्सर पड़वो के नाम से मनाता है। कर्नाटक में गुडी पड़वा को युगाड़ी पर्व के नाम से जाना जाता है। आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे उगाड़ी नाम से जानते हैं। 
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जानें इसका महत्व

जानें इसका महत्व
हिन्दु गुड़ी पड़वा के दिन घर के दरवाजों पर गुड़ी लगाते हैं और घर के दरवाजों पर आम के पत्तों से बंदनवार सजाते हैं। ये बंदनवार घर में सुख-समृद्धि और खुशियों का प्रतीक है।
इस दिन सूर्य की उपासना के साथ ही निरोगी जीवन, घर में सुख- समृद्धि और पवित्र आचरण की प्रार्थना की जाती है। प्रार्थना के बाद घर के आंगन में गुडी सजाई जाती है। लोग इस दिन नए कपड़े पहनते हैं और शक्कर से बने खिलौनों की माला पहनते हैं। पूरनपोली और श्रीखंड का नैवेद्य चढ़ा कर नवरात्रि यानि नवदुर्गा, श्रीराम जी और हनुमान जी आराधना की जाती है।

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